लखनऊ में अन्नप्राशन संस्कार

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शिशु को प्रथम बार अन्न ग्रहण कराने का संस्कार।

क्यों की जाती है

अन्नप्राशन सोलह संस्कारों में से एक है, जिसमें शिशु को पहली बार अन्न चखाया जाता है। माता के दूध से अन्न की ओर यह परिवर्तन शास्त्रों में शुभ मुहूर्त में, देव पूजन के साथ किया जाता है ताकि शिशु का स्वास्थ्य एवं आयु उत्तम रहे।

विधि

गणेश एवं कुलदेवता पूजन के बाद संकल्प होता है। खीर अथवा मीठे भात का भोग लगाकर शिशु को चाँदी की चम्मच से प्रथम ग्रास कराया जाता है। इसके बाद आशीर्वाद एवं आरती होती है।

तैयारी

चाँदी की चम्मच एवं कटोरी, खीर अथवा मीठा भात, नए वस्त्र, कलश, हल्दी-कुमकुम एवं फल चाहिए। सामग्री सहित पैकेज में पूजन सामग्री सम्मिलित है।

मुहूर्त

शिशु के छठे अथवा आठवें मास में — पुत्र हेतु सम मास, पुत्री हेतु विषम मास शुभ माने जाते हैं। रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य एवं रेवती नक्षत्र उत्तम हैं।

कितना समय

लगभग 1-2 घंटे।