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शिशु के जन्म के बाद जातकर्म एवं नामकरण संस्कार।
जातकर्म जन्म के तुरंत बाद तथा नामकरण सामान्यतः ग्यारहवें अथवा बारहवें दिन किया जाता है। शिशु का नाम जन्म नक्षत्र के अनुसार तय कर विधिवत घोषित किया जाता है।
गणेश एवं कुलदेवता पूजन के बाद संकल्प होता है। जन्म नक्षत्र के अनुसार अक्षर निकालकर शिशु का नाम कान में कहा जाता है, फिर सबके समक्ष घोषणा होती है। आशीर्वाद एवं आरती के साथ विधि पूर्ण होती है।
शिशु के जन्म का समय एवं स्थान, नए वस्त्र, कलश, हल्दी-कुमकुम, फल एवं मिष्ठान चाहिए। जन्म विवरण से पंडित जी नक्षत्र एवं अक्षर निकाल देते हैं।
जन्म से ग्यारहवाँ, बारहवाँ अथवा सोलहवाँ दिन शास्त्रसम्मत है। शुक्ल पक्ष एवं शुभ नक्षत्र देखकर तिथि तय की जाती है।
लगभग 1-2 घंटे।