लखनऊ में नामकरण संस्कार के लिए सत्यापित पंडित जी बुक करें।
नवजात शिशु के नामकरण की वैदिक विधि, नक्षत्र अनुसार नाम निर्धारण सहित।
नामकरण सोलह संस्कारों में पाँचवाँ संस्कार है। जन्म नक्षत्र के अनुसार अक्षर निकालकर शिशु का नाम रखा जाता है, जिससे नाम का प्रभाव जीवन भर शुभ रहे।
गणेश एवं षष्ठी देवी का पूजन कर संकल्प होता है। जन्म कुंडली से नक्षत्र चरण देखकर नामाक्षर निकाला जाता है। फिर शिशु के कान में नाम कहकर आशीर्वाद दिया जाता है।
शिशु की जन्म तिथि, समय एवं स्थान — कुंडली बनाने हेतु आवश्यक। नए वस्त्र, मधु, घी, अक्षत एवं मिष्ठान्न।
जन्म के ग्यारहवें अथवा बारहवें दिन शुभ माना जाता है। न हो सके तो शुक्ल पक्ष का कोई भी शुभ दिन चुना जा सकता है।
लगभग 1-2 घंटे।