लखनऊ में गोद भराई (सीमंतोन्नयन)

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गर्भवती स्त्री एवं गर्भस्थ शिशु के कल्याण हेतु संस्कार।

क्यों की जाती है

सीमंतोन्नयन गर्भावस्था के दौरान किया जाने वाला संस्कार है, जिसमें माता एवं गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं शुभ संस्कारों की कामना की जाती है। परिवार की स्त्रियाँ मिलकर माता को आशीर्वाद देती हैं।

विधि

गणेश एवं कुलदेवता पूजन के बाद संकल्प होता है। माता का श्रृंगार कर गोद में फल, मिष्ठान एवं वस्त्र रखे जाते हैं। मंत्रोच्चार के साथ आशीर्वाद एवं आरती होती है।

तैयारी

नए वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, फल, मिष्ठान, नारियल, हल्दी-कुमकुम एवं कलश चाहिए।

मुहूर्त

गर्भावस्था के छठे अथवा आठवें मास में किया जाता है। शुक्ल पक्ष, तथा रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य एवं अनुराधा नक्षत्र उत्तम माने जाते हैं।

कितना समय

लगभग 1-2 घंटे।