लखनऊ में उपनयन (जनेऊ) संस्कार के लिए सत्यापित पंडित जी बुक करें।
यज्ञोपवीत धारण एवं गायत्री उपदेश का संस्कार।
उपनयन वह संस्कार है जिसमें बालक को यज्ञोपवीत धारण कराकर गायत्री मंत्र का उपदेश दिया जाता है। इसे दूसरा जन्म कहा गया है — यहीं से विद्यार्जन एवं धर्म पालन का अधिकार आरंभ होता है।
गणेश पूजन, नांदी श्राद्ध एवं मातृका पूजन के बाद बटुक का मुंडन एवं स्नान होता है। फिर यज्ञोपवीत धारण कराकर आचार्य द्वारा गायत्री उपदेश दिया जाता है। हवन, भिक्षाटन एवं आशीर्वाद के साथ विधि पूर्ण होती है।
यज्ञोपवीत, मेखला, दंड, कौपीन, नए वस्त्र, हवन सामग्री एवं भिक्षा पात्र चाहिए। पूरी सूची पंडित जी पहले ही दे देते हैं।
वसंत ऋतु, विशेषकर माघ से ज्येष्ठ मास उत्तम है। बालक की आयु आठ से सोलह वर्ष के बीच शास्त्रसम्मत मानी जाती है। शुक्ल पक्ष एवं शुभ नक्षत्र देखकर तिथि तय की जाती है।
लगभग 3-4 घंटे।