भूमि पूजन के लिए सत्यापित पंडित जी बुक करें।
निर्माण आरंभ से पूर्व भूमि देवता एवं वास्तु पुरुष का पूजन।
कोई भी निर्माण आरंभ करने से पहले भूमि से अनुमति लेने की परंपरा है। भूमि पूजन में शेषनाग, वास्तु पुरुष एवं क्षेत्रपाल का आवाहन कर भूखंड के दोषों का शमन किया जाता है, जिससे निर्माण निर्विघ्न पूर्ण हो और भवन में रहने वालों को शांति मिले।
गणेश पूजन एवं संकल्प के बाद भूखंड के ईशान कोण में कलश स्थापना होती है। नाग-नागिन की चाँदी अथवा ताँबे की प्रतिमा, सुपारी एवं सिक्के भूमि में स्थापित कर वास्तु पूजन किया जाता है। अंत में नींव में प्रथम ईंट रखकर हवन एवं आरती होती है।
नारियल, कलश, आम के पत्ते, हल्दी-कुमकुम, पंचरत्न, नाग-नागिन प्रतिमा, ईंट एवं हवन सामग्री चाहिए। सामग्री सहित पैकेज लेने पर यह सब पंडित जी लेकर आते हैं।
वैशाख, श्रावण, माघ एवं फाल्गुन मास शुभ हैं। रोहिणी, उत्तरा, चित्रा एवं अनुराधा नक्षत्र उत्तम माने जाते हैं। शुक्ल पक्ष की तिथि प्राथमिकता में रहती है।
लगभग 2-3 घंटे।