चंडी पाठ एवं हवन

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दुर्गा सप्तशती का पाठ एवं चंडी हवन — शक्ति उपासना का प्रमुख अनुष्ठान।

क्यों की जाती है

चंडी पाठ माँ दुर्गा की उपासना का सर्वोच्च अनुष्ठान माना जाता है। शत्रु बाधा, भय, रोग एवं दीर्घकालीन संकट के निवारण हेतु सप्तशती के तेरह अध्यायों का पाठ एवं हवन कराया जाता है।

विधि

कलश स्थापना, नवार्ण मंत्र जाप एवं संकल्प के बाद दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों का पाठ होता है। इसके पश्चात चंडी हवन, पूर्णाहुति, कन्या पूजन एवं आरती की जाती है।

तैयारी

दुर्गा प्रतिमा अथवा चित्र, लाल वस्त्र, कलश, नारियल, लाल पुष्प, हवन सामग्री, काले तिल एवं कन्या पूजन हेतु सामग्री चाहिए।

मुहूर्त

चैत्र एवं आश्विन नवरात्रि सर्वोत्तम हैं। अष्टमी एवं नवमी तिथि विशेष फलदायी है। शुक्रवार एवं मंगलवार भी उत्तम माने जाते हैं।

कितना समय

लगभग 4-6 घंटे।