गंगा आरती एवं स्नान पूजन

गंगा आरती एवं स्नान पूजन के लिए सत्यापित पंडित जी बुक करें।

काशी, प्रयागराज एवं तीर्थ घाटों पर गंगा पूजन, आरती एवं संकल्प स्नान।

क्यों की जाती है

गंगा स्नान एवं आरती तीर्थ यात्रा का केंद्रीय अंग है। संकल्प लेकर किया गया स्नान, गंगा पूजन एवं दीपदान पापों के शमन एवं पितरों की तृप्ति से जोड़ा जाता है।

विधि

घाट पर संकल्प के बाद गंगा जल से आचमन एवं स्नान होता है। गंगा पूजन, दुग्धाभिषेक एवं पुष्प अर्पण के बाद दीपदान किया जाता है। संध्या काल में महाआरती के साथ समापन होता है।

तैयारी

दीप, फूल, दूध, गंगाजल पात्र, नारियल, चुनरी एवं दान हेतु वस्त्र चाहिए। घाट पर बैठने एवं पूजन की व्यवस्था पंडित जी कराते हैं।

मुहूर्त

कार्तिक पूर्णिमा, गंगा दशहरा, माघ मास एवं मकर संक्रांति सर्वोत्तम हैं। प्रातःकाल एवं संध्या आरती दोनों उपयुक्त हैं।

कितना समय

लगभग 1-2 घंटे।