महामृत्युंजय जाप

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आरोग्य, आयु एवं संकट निवारण हेतु महामृत्युंजय मंत्र का जाप एवं हवन।

क्यों की जाती है

महामृत्युंजय मंत्र को आयु एवं आरोग्य का सर्वश्रेष्ठ मंत्र माना गया है। गंभीर रोग, दुर्घटना की आशंका अथवा ग्रह पीड़ा की स्थिति में सवा लाख अथवा नियत संख्या में इसका जाप एवं दशांश हवन कराया जाता है।

विधि

गणेश पूजन, कलश स्थापना एवं संकल्प के बाद शिवलिंग का अभिषेक होता है। फिर नियत संख्या में महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। जाप का दशांश हवन, तर्पण, मार्जन एवं ब्राह्मण भोजन के साथ अनुष्ठान पूर्ण होता है।

तैयारी

शिवलिंग, रुद्राक्ष माला, बेलपत्र, पंचामृत, काले तिल, दूर्वा, हवन सामग्री एवं शुद्ध घी चाहिए। जाप संख्या के अनुसार पंडित जी की संख्या तय होती है।

मुहूर्त

श्रावण मास, महाशिवरात्रि एवं प्रदोष तिथि सर्वोत्तम हैं। सोमवार विशेष रूप से शुभ है। रोग की स्थिति में तिथि की प्रतीक्षा किए बिना भी कराया जा सकता है।

कितना समय

लगभग 3-5 घंटे।