मुंडन संस्कार

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बालक के प्रथम केश उतारने का शास्त्रोक्त संस्कार, हवन एवं आशीर्वाद सहित।

क्यों की जाती है

चूड़ाकर्म अथवा मुंडन सोलह संस्कारों में आठवाँ संस्कार है। जन्म के समय के केश उतारकर बालक की शुद्धि की जाती है। मान्यता है कि इससे बालक के मस्तिष्क का विकास होता है और आयु एवं बल की वृद्धि होती है।

विधि

गणेश एवं कुलदेवता पूजन के पश्चात संकल्प होता है। मामा अथवा नाना की गोद में बैठाकर बालक के केश उतारे जाते हैं। इसके बाद स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और हवन कर आशीर्वाद दिया जाता है।

तैयारी

नए वस्त्र, हल्दी, दही, नाई की व्यवस्था, हवन सामग्री, फल एवं मिष्ठान्न। उतारे गए केश किसी पवित्र नदी अथवा मंदिर में प्रवाहित करने की परंपरा है।

मुहूर्त

सामान्यतः पहले, तीसरे अथवा पाँचवें वर्ष में किया जाता है। माघ, फाल्गुन, वैशाख एवं ज्येष्ठ मास शुभ हैं। बालक के जन्म नक्षत्र एवं शुक्ल पक्ष का ध्यान रखा जाता है।

कितना समय

लगभग 2 घंटे।