रुद्राभिषेक

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भगवान शिव का पंचामृत एवं रुद्री पाठ सहित अभिषेक।

क्यों की जाती है

रुद्राभिषेक शिव आराधना का सर्वोच्च रूप माना जाता है। रुद्री के मंत्रों के साथ शिवलिंग पर निरंतर अभिषेक करने से रोग, ऋण एवं ग्रह पीड़ा से मुक्ति मिलती है — काशी में इसकी परंपरा अत्यंत प्राचीन है।

विधि

संकल्प के बाद शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद एवं शर्करा से पंचामृत अभिषेक होता है। साथ-साथ रुद्री का पाठ चलता है। अंत में बिल्वपत्र अर्पण, आरती एवं प्रसाद वितरण होता है।

तैयारी

शिवलिंग (अथवा पार्थिव शिवलिंग बनाया जा सकता है), दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, गंगाजल, बिल्वपत्र, धतूरा एवं भांग।

मुहूर्त

सोमवार, प्रदोष एवं महाशिवरात्रि सर्वोत्तम हैं। श्रावण मास में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। प्रातःकाल अथवा प्रदोष काल उपयुक्त रहता है।

कितना समय

लगभग 2 घंटे।