श्री सत्यनारायण व्रत कथा

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भगवान सत्यनारायण की कथा, पूजन एवं आरती — पूर्णिमा तथा शुभ अवसरों हेतु।

क्यों की जाती है

श्री सत्यनारायण व्रत कथा हर शुभ कार्य की पूर्णता पर की जाने वाली सबसे प्रचलित पूजा है — नया घर, नया व्यापार, विवाह, संतान प्राप्ति या कोई मनोकामना पूर्ण होने पर। मान्यता है कि सत्य के रूप में नारायण की आराधना से परिवार पर आने वाले संकट टलते हैं।

विधि

गणेश पूजन एवं संकल्प के बाद कलश स्थापना होती है। फिर भगवान सत्यनारायण का षोडशोपचार पूजन कर पाँच अध्यायों में कथा का वाचन होता है। कथा के उपरांत आरती, पंचामृत एवं चूरमे के प्रसाद का वितरण किया जाता है।

तैयारी

चौकी, पीला वस्त्र, कलश, केले के पत्ते, पंचामृत, तुलसी दल, ऋतुफल एवं प्रसाद हेतु आटा-सूजी, गुड़ अथवा शक्कर, घी और केला चाहिए।

मुहूर्त

पूर्णिमा, विशेषकर कार्तिक एवं वैशाख पूर्णिमा सर्वोत्तम है। संक्रांति एवं एकादशी भी शुभ मानी जाती है। वैसे यह कथा किसी भी शुभ दिन संध्या काल में की जा सकती है।

कितना समय

लगभग 2-3 घंटे।