शनि शांति

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साढ़े साती एवं शनि की दशा में शांति हेतु पूजन, जाप एवं हवन।

क्यों की जाती है

शनि की साढ़े साती अथवा ढैया के काल में कार्य में बाधा, विलंब एवं मानसिक तनाव की शिकायत सामान्य है। शनि शांति अनुष्ठान में शनि देव का पूजन, मंत्र जाप एवं दान द्वारा ग्रह पीड़ा का शमन किया जाता है।

विधि

गणेश पूजन, नवग्रह स्थापना एवं संकल्प के बाद शनि यंत्र की स्थापना होती है। शनि मंत्र का नियत जाप कर दशांश हवन किया जाता है। तेल, उड़द, काले वस्त्र एवं लोहे का दान कर अनुष्ठान पूर्ण होता है।

तैयारी

सरसों का तेल, उड़द दाल, काला वस्त्र, काले तिल, लोहे की वस्तु, हवन सामग्री एवं जन्म कुंडली की प्रति चाहिए।

मुहूर्त

शनिवार सर्वोत्तम है। शनि अमावस्या एवं शनि जयंती विशेष फलदायी मानी जाती है। संध्या काल उपयुक्त है।

कितना समय

लगभग 3-4 घंटे।