वास्तु शांति

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भवन के वास्तु दोष निवारण हेतु पूजन एवं हवन।

क्यों की जाती है

यदि भवन के निर्माण में दिशा अथवा वास्तु के नियमों का पालन न हो सका हो, तो वास्तु शांति से उन दोषों का शमन किया जाता है। इससे घर में कलह कम होती है और स्थिरता आती है।

विधि

वास्तु पुरुष का आवाहन एवं पूजन कर नवग्रह शांति की जाती है। भवन के चारों कोनों में जल एवं मंत्रोच्चार से शुद्धि होती है, फिर हवन एवं पूर्णाहुति की जाती है।

तैयारी

कलश, नारियल, हवन सामग्री, तांबे का सिक्का, गंगाजल एवं वास्तु यंत्र (यदि स्थापित करना हो)।

मुहूर्त

गृह प्रवेश के साथ अथवा किसी भी शुभ मुहूर्त में की जा सकती है। शुक्ल पक्ष एवं स्थिर लग्न उत्तम है।

कितना समय

लगभग 3 घंटे।