तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और चौघड़िया — आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार।
तिथि (चंद्र दिवस), वार, नक्षत्र (चंद्रमा किस नक्षत्र में है), योग और करण — इन्हीं पाँच से दिन की शुभता देखी जाती है। इसके साथ राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और अभिजीत मुहूर्त भी दिए जाते हैं।
हिंदू दिन सूर्योदय से शुरू होता है, और सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है। इसलिए लखनऊ और मुंबई का राहुकाल एक ही दिन अलग-अलग समय पर पड़ता है।
परंपरा में राहुकाल में नए कार्य का आरंभ, गृह प्रवेश, यात्रा का आरंभ या खरीदारी जैसे शुभ कार्य टाले जाते हैं। पहले से चल रहे काम पर इसका विचार नहीं होता।
दिन के मध्य का लगभग 48 मिनट का समय, जो अधिकांश शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है (बुधवार को छोड़कर)।
दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटकर हर भाग को शुभ, लाभ, अमृत, चर, उद्वेग, रोग या काल कहा जाता है। छोटे कार्यों का समय चुनने में इसका उपयोग होता है।